ईरान युद्ध, कमजोर उम्मीदवार और ट्रंप का ओवरकॉन्फिडेंस: न हाउस में मिली जीत, न सीनेट में चला जादू; चुनावी मुकाबले में किसने मारी बाजी और किसे मिली शिकस्त?
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए। सीनेट में रिपब्लिकन की सात सीटें कम होने से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। टेक्सास, कंसास, आयोवा, ओहायो और दक्षिण कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। गवर्नर चुनावों में भी चार ऐसे राज्यों में सत्ता परिवर्तन हुआ, जहां पहले रिपब्लिकन काबिज थे। इस चुनाव में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया, जबकि ट्रंप के करीबी माने जाने वाले विवेक रामास्वामी को ओहायो में हार झेलनी पड़ी। ईरान युद्ध, बढ़ती महंगाई, टैरिफ नीतियों का असर, कमजोर उम्मीदवारों का चयन और ट्रंप सरकार के प्रति बढ़ता असंतोष रिपब्लिकन पार्टी की हार के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका लगा है। तीन नवंबर को हुए मतदान की मतगणना के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में बहुमत हासिल कर लिया। इस नतीजे के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों से कांग्रेस पर कायम रिपब्लिकन पार्टी का वर्चस्व समाप्त हो गया है।
यह चुनाव कई मायनों में अहम माना जा रहा था। दरअसल, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साथ-साथ कांग्रेस के दोनों सदनों में भी रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा कायम किया था। इससे उनकी सरकार को विधायी फैसले लेने में काफी मजबूती मिली थी। हालांकि, मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने सत्ता का यह समीकरण बदल दिया है और अब संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण स्थापित हो गया है।

सीनेट में सात सीटों का नुकसान, डेमोक्रेट्स ने पलटा चुनावी पासा
चुनाव से पहले अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें थीं। वहीं, डेमोक्रेट्स के 45 सदस्य थे और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी उन्हें हासिल था। लेकिन इस बार के चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को सात सीटों पर शिकस्त देकर सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। शुरुआती नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक खेमे को 54 और रिपब्लिकन पार्टी को 44 सीटें मिलीं। डेमोक्रेटिक खेमे की संख्या में दो निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं और सदन में बहुमत के लिए 51 सीटों का आंकड़ा जरूरी है।
प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स का दबदबा
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों के लिए हुए चुनाव में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। सदन में बहुमत के लिए 218 सीटें हासिल करना जरूरी है, जिसे डेमोक्रेट्स ने पार कर लिया। शुरुआती चुनावी अनुमानों में पार्टी को 228 सीटें मिलने की संभावना जताई गई, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार 139 सीटों पर आगे दिखाई दिए। हालांकि, कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना जारी थी।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की जीत से पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज के लिए जनवरी 2027 में स्पीकर बनने का रास्ता खुल गया है। अगर वह इस पद पर पहुंचते हैं तो अमेरिकी इतिहास में प्रतिनिधि सभा के पहले अश्वेत स्पीकर होंगे।
कांग्रेस के दोनों सदनों में सत्ता का समीकरण बदलने से राष्ट्रपति ट्रंप के लिए आगे का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहने वाला है। कानूनों को मंजूरी दिलाने, सरकारी बजट पारित कराने और प्रशासनिक एजेंडे को लागू करने के लिए उन्हें अब डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। विपक्षी दल का नियंत्रण बढ़ने से उनके कई प्रस्तावों पर अड़चनें आने की आशंका है।
टेक्सास से मेन तक सात राज्यों में रिपब्लिकन को शिकस्त, जानिए किसने किसे हराया
सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की सबसे बड़ी उपलब्धि उन राज्यों में जीत हासिल करना रही, जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। सात राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराकर डेमोक्रेट्स ने सीनेट की चुनावी तस्वीर बदल दी।
- टेक्सास: यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन नेता केन पैक्सटन को मात दी। इस जीत के साथ टेक्सास में 1988 के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने सीनेट का चुनाव जीता। पैक्सटन राज्य के पूर्व अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों में उनकी गिनती होती थी। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असहमति देखने को मिली थी।
- कंसास: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को चुनाव में पराजित किया। कंसास में 1932 के बाद पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई उम्मीदवार सीनेट तक पहुंचने में सफल रहा। लगभग 94 साल बाद आया यह राजनीतिक बदलाव चुनाव के बड़े उलटफेरों में शामिल रहा। हैमिल्टन पेशे से पादरी हैं और देश के प्रमुख मेथोडिस्ट चर्च से जुड़े रहे हैं।
- आयोवा: इस राज्य में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोश ट्यूरेक ने रिपब्लिकन प्रत्याशी एश्ले हिंसन को हराकर जीत हासिल की। पहले यह सीट रिपब्लिकन पार्टी के पास थी। ट्यूरेक की सफलता इसलिए भी अहम मानी गई, क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को आयोवा में अच्छी बढ़त मिली थी।
- नॉर्थ कैरोलिना: राज्य के पूर्व गवर्नर और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रॉय कूपर ने रिपब्लिकन प्रत्याशी माइकल व्हाटली को हराया। इस जीत के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन के कब्जे वाली एक और सीनेट सीट अपने नाम कर ली।
- ओहायो: डेमोक्रेटिक नेता शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन हस्टेड को हराकर एक बार फिर सीनेट में जगह बनाई। ब्राउन पहले भी इस सदन के सदस्य रह चुके हैं। ओहायो का यह मुकाबला इसलिए खास था, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का इस राज्य में मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।
- मेन: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने पांच बार सीनेटर रह चुकी रिपब्लिकन नेता सुसान कॉलिन्स को चुनाव में हरा दिया। कॉलिन्स पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में शामिल थीं। उनकी हार को रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़े राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा गया।
- दक्षिण कैरोलिना: यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन प्रत्याशी डार्लिन ग्राहम को पराजित किया। डार्लिन, दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं। जुलाई में लिंडसे ग्राहम के निधन के बाद उन्हें इस सीट पर नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी उनके पक्ष में समर्थन जताया था, लेकिन इसके बावजूद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहीं।
इन सात राज्यों के अलावा जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ ने अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की। वहीं, न्यू हैम्पशायर में क्रिस पप्पास ने भी जीत दर्ज की।
प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स की जोरदार वापसी, कई सीटों पर बदला चुनावी गणित
प्रतिनिधि सभा के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने केवल बहुमत का आंकड़ा ही पार नहीं किया, बल्कि कई ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में भी जीत दर्ज की, जहां रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। पार्टी ने कुछ ऐसी सीटें भी अपने नाम कीं, जिन पर लंबे समय से रिपब्लिकन नेताओं का कब्जा था।
न्यू जर्सी की सातवीं कांग्रेसनल सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रेबेका बेनेट ने रिपब्लिकन सांसद टॉम कीन जूनियर को हराया। पेंसिल्वेनिया की सातवीं सीट से बॉब ब्रूक्स ने रयान मैकेंजी को मात दी। इसी राज्य की आठवीं सीट पर पैगे कोगनेटी और दसवीं सीट पर जेनेल स्टेलसन ने जीत हासिल कर डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत की।
केंटकी की छठी सीट पर जैक डेम्बो ने रिपब्लिकन उम्मीदवार राल्फ अल्वाराडो को पराजित किया। विस्कॉन्सिन में भी डेमोक्रेटिक पार्टी को दो अहम सफलताएं मिलीं। यहां पहली सीट से मिशेल बर्मन और तीसरी सीट से रेबेका कुक ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराया।
इसके अलावा आयोवा की तीसरी सीट से सारा ट्रोन गैरीट, नॉर्थ कैरोलिना की 11वीं सीट से जेमी एगर और कोलोराडो की आठवीं सीट से मैनी रुटिनेल ने जीत दर्ज की। कैलिफोर्निया की पहली सीट पर माइक मैकगायर और वर्जीनिया की दूसरी सीट पर एलेन लुरिया ने डेमोक्रेटिक पार्टी के खाते में सफलता जोड़ी।
अलबामा की दूसरी कांग्रेसनल सीट से शोमारी फिगर्स की जीत भी खास रही। इस सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की सफलता ने राज्य में पार्टी की चुनावी स्थिति को और मजबूत किया।
गवर्नर चुनाव में भी चार राज्यों में बदली सत्ता, डेमोक्रेट्स ने बढ़ाया प्रभाव
मध्यावधि चुनाव के दौरान अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान कराया गया। इन चुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए चार ऐसे राज्यों में जीत दर्ज की, जहां पहले रिपब्लिकन गवर्नर सत्ता में थे। जॉर्जिया, आयोवा, ओहायो और टेक्सास में सत्ता परिवर्तन हुआ।
- जॉर्जिया: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम्स ने रिपब्लिकन प्रत्याशी रिक जैक्सन को हराकर गवर्नर पद का चुनाव जीत लिया। इस जीत के साथ वह जॉर्जिया की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता को राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
- ओहायो: यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को पराजित किया। जीत के साथ वह ओहायो की पहली महिला गवर्नर बनेंगी। राज्य में करीब 20 वर्षों बाद किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को गवर्नर पद पर जीत मिली है।
- आयोवा: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार रॉब सैंड ने रिपब्लिकन प्रत्याशी जैक लान को हराकर सत्ता परिवर्तन कर दिया। इस नतीजे के साथ राज्य में रिपब्लिकन पार्टी का गवर्नर पद पर कब्जा समाप्त हो गया।
- टेक्सास: इस राज्य में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने मौजूदा रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर चुनाव का बड़ा उलटफेर किया। वह टेक्सास की पहली लैटिना गवर्नर बनने जा रही हैं। लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले इस राज्य में 1990 के दशक के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेटिक नेता के गवर्नर बनने का रास्ता साफ हुआ है।
इन चुनावी नतीजों के अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी ने कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया, मैरीलैंड और इलिनॉय जैसे अपने मजबूत राज्यों में भी सत्ता बरकरार रखी। इससे राज्य सरकारों में पार्टी की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है।
भारतीय मूल के उम्मीदवारों का प्रदर्शन: कई ने हासिल की जीत, विवेक रामास्वामी को मिली हार
इस बार के अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल के प्रत्याशियों की भागीदारी और उनका प्रदर्शन भी चर्चा का विषय रहा। कांग्रेस से लेकर राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों तक, अलग-अलग पदों के लिए भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। इंडो-अमेरिकन न्यूज सर्विस के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न पदों पर कम से कम 57 भारतीय मूल के उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इनमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशी शामिल थे।
- पिया दांडिया: फ्लोरिडा की 22वीं कांग्रेसनल सीट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने रिपब्लिकन प्रत्याशी केसी अस्कर को हराया। वह पहले स्कूल प्रिंसिपल के रूप में काम कर चुकी हैं। उनकी जीत से भारतीय मूल की एक और महिला को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने का अवसर मिला।
- सुहास सुब्रमण्यम: वर्जीनिया की दसवीं कांग्रेसनल सीट पर डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। सुब्रमण्यम ने 2024 में वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचकर भारतीय मूल के पहले अमेरिकी सांसद बनने का गौरव हासिल किया था।
- अरुणा मिलर: मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी दोबारा चुनाव जीतकर अपना पद बरकरार रखा। वह डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव मैदान में थीं। दोनों ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराकर एक बार फिर राज्य की सत्ता में अपनी जगह सुनिश्चित की।
- रो खन्ना: कैलिफोर्निया की 17वीं कांग्रेसनल सीट से डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने भी दोबारा चुनाव लड़ा। शुरुआती मतगणना के दौरान उनकी सीट का परिणाम घोषित नहीं हुआ था, लेकिन बाद की रिपोर्टों में उनकी जीत की पुष्टि हुई।
- अमी बेरा: कैलिफोर्निया की तीसरी कांग्रेसनल सीट से डेमोक्रेटिक सांसद अमी बेरा आठवीं बार चुनावी मैदान में उतरे। शुरुआती रुझानों में वह अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे चल रहे थे। शुरुआती रिपोर्टिंग के समय उनकी सीट पर अंतिम परिणाम का इंतजार था।
- प्रमिला जयपाल: वाशिंगटन राज्य की सातवीं कांग्रेसनल सीट से डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने भी फिर से चुनाव लड़ा। बाद में सामने आई रिपोर्टों में उनकी जीत की जानकारी दी गई।
- विवेक रामास्वामी: रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख भारतीय मूल के नेताओं में शामिल विवेक रामास्वामी ओहायो में गवर्नर पद के उम्मीदवार थे। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन प्राप्त था। इसके बावजूद डेमोक्रेटिक प्रत्याशी एमी एक्टन ने उन्हें चुनाव में हरा दिया। रामास्वामी की हार इस चुनाव में भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए सबसे चर्चित नतीजों में से एक रही।


