
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता बार-बार उसे क्यों नकार रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और वर्ष 1985 के बाद पार्टी दोबारा राज्य में सरकार नहीं बना सकी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश की जनता ने करीब 41 साल पहले ही कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया था। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को अपनी हार के कारणों की समीक्षा करने के बजाय दूसरों को दोष देने से बचना चाहिए।

चुनाव में जीत का श्रेय खुद को, हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराती है कांग्रेस: सीएम योगी
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर पार्टी इसका श्रेय अपनी मेहनत और क्षमता को देती है, लेकिन हार का सामना करने पर ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने कहा कि जब न्यायालय तथ्यों और कानूनी पहलुओं के आधार पर फैसला सुनाता है, तब भी उस पर सवाल खड़े करने की कोशिश की जाती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ओर से संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने, उनके खिलाफ बयानबाजी करने और दबाव बनाने जैसे कदम उठाए जाते हैं। उनके अनुसार, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े करना और विवाद की स्थिति पैदा करना कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन गया है।
सीएम योगी की कांग्रेस को नसीहत, बोले- जनता का भरोसा खो चुके नेतृत्व में बदलाव करे पार्टी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को लगातार मिल रही चुनावी हार के कारणों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी और प्रदेश की जनता ने करीब 41 वर्ष पहले ही पार्टी को सरकार से बाहर कर दिया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, देश के कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के प्रति लोगों का समर्थन कम हुआ है। उन्होंने पार्टी नेताओं को अपने नेतृत्व की कार्यशैली की समीक्षा करने और उसमें जरूरी बदलाव करने की सलाह दी। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में अव्यवस्था का माहौल बनाने और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने से बचना चाहिए।


