रेखा आर्या प्रकरण में पुलिस का शिकंजा तेज, गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर के खिलाफ गैर जमानती वारंट

रेखा आर्या प्रकरण में पुलिस का शिकंजा तेज, गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर के खिलाफ गैर जमानती वारंट

रेखा आर्या प्रकरण में पुलिस का शिकंजा तेज, गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर के खिलाफ गैर जमानती वारंट

देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े मामले में पुलिस ने जांच की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर के खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट (NBW) हासिल कर लिया गया है। दोनों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। पुलिस की प्राथमिकता अब दोनों को तलाशने के साथ-साथ मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाना है।

कई राज्यों में तलाश कर रही पुलिस

गिरधारी लाल साहू लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उनकी तलाश में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी पुलिस टीमें भेजी गई हैं। जांच एजेंसियां उनके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

वहीं, सतेंद्र राठौर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ और दस्तावेजों की बरामदगी से मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं।

कंपनियों के दस्तावेज बने जांच का अहम हिस्सा

जांच के दौरान कई कंपनियों से संबंधित रिकॉर्ड सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, पांच कंपनियों से जुड़े कुछ दस्तावेजों की प्रतियां मिली थीं, लेकिन मूल दस्तावेज अभी तक जांच टीम को उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के निदेशक पद से रेखा आर्या को हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सतेंद्र राठौर को निदेशक बनाए जाने का मामला भी जांच में शामिल है।

15 अक्टूबर को दर्ज हुई थी शिकायत

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 15 अक्टूबर को हुई थी, जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून की कैंट कोतवाली में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उत्पीड़न, मारपीट, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था। जांच टीम शिकायतकर्ता, संबंधित लोगों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

अब गिरफ्तारी और दस्तावेजों की बरामदगी पर नजर

दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस की कार्रवाई और महत्वपूर्ण हो गई है। अब जांच एजेंसियों के सामने आरोपियों का पता लगाने, उन्हें न्यायालय के सामने पेश करने और कंपनियों के मूल रिकॉर्ड हासिल करने की चुनौती है।

फिलहाल मामले में जांच जारी है। आरोपों की सच्चाई और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

UTTRAKHAND 27 | देहरादून

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